शुक्रवार 6 फ़रवरी 2026 - 18:36
ईरान जंग तलब नहीं है लेकिन धमकियों के सामने क़तई डरने वाला नहीं है।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मोहम्मदी

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मोहम्मदी ने इस्लामी जम्हूरिया-ए-ईरान की तवानाई की तरफ़ इशारा करते हुए कहा,ईरानी क़ौम कभी भी जंग की शुरुआत करने वाली नहीं रही, लेकिन अपने मुफ़ादात और अमन-ओ-अमनियत के दिफ़ा में पूरी तरह तवानामंद और तैयार है, और तारीख़ इस हक़ीक़त की वाज़ेह गवाही देती है। ईरान जंग-तलब नहीं है, लेकिन धमकियों के सामने क़तई तौर पर डटा रहता है

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन क़ादिर मोहम्मदी ने इमाम-ए-जुमआ, ने इस हफ़्ते के ख़ुत्बा-ए-जुमआ में इस्लामी जम्हूरिया-ए-ईरान की तवानाई का ज़िक्र करते हुए कहा,ईरानी क़ौम कभी जंग की आग़ाज़ करने वाली नहीं है, लेकिन अपने मुफ़ादात और अमनियत की हिफ़ाज़त में क़ाबिल-ए-क़दर क़ुव्वत और तैयारी रखती है, और तारीख़ इस बात को ख़ूब साबित करती है।

उन्होंने दुश्मनों की जानिब से किसी भी ग़लत क़दम के हवाले से तंबीह करते हुए ज़ोर देकर कहा: अमरीका की तरफ़ से किसी भी ग़लत अंदाज़ा-साज़ी के नतीजे में मिंतक़े में उनके लिए संगीन अंजामात सामने आ सकते हैं।

उन्होने कहां,रहबर-ए-मोअज़्ज़म-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी के हालिया पैग़ामात की तरफ़ इशारा करते हुए कहा,फ़रमानदेह-ए-आला-ए-क़ुव्वा-ए-मुसल्लहा ने हरम-ए-मुतहर इमाम ख़ुमैनी (रह.) से दुनिया को इस्लामी जम्हूरिया-ए-ईरान की इक़्तिदार, सुकून और इस्तेहकाम का पैग़ाम पहुंचाया।

उन्होंने मौजूदा हस्सास हालात से उबरने में अवामी एतिमाद के किरदार पर ज़ोर देते हुए कहा,अवाम को निज़ाम, हुकूमत और मुल्की ज़िम्मेदारों की तरफ़ उम्मीद-भरी निगाह से देखना चाहिए, क्योंकि यही एतिमाद क़ौमी इस्तेहकाम की बुनियाद और तारीखी मराहिल से कामयाबी के साथ गुज़रने का ज़रिया है।

हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन मोहम्मदी ने मोज़ाकरात के मौज़ू पर भी कहा, रहबर-ए-मोअज़्ज़म-ए-इंक़िलाब की हकीमाना तदाबीर के दायरे में और मैदान व दीपालीमासी के दरमियान हम-आहंगी के साथ उठाया जाता है।उन्होंने मुल्क की दिफ़ाई क़ुव्वतों की आमादगी को अमरीका के निज़ामी रहनुमा-साज़ों के लिए एक वाज़ेह पैग़ाम क़रार दिया।

ख़ुत्बे के दूसरे हिस्से में, इमाम-ए-जुमआ नज़रआबाद ने 22 बहमन की शानदार अवामी शिरकत को इंक़िलाब-ए-इस्लामी, इमाम-ए-राहिल और शोहदा-ए-इंक़िलाब के आरमानों से क़ौम की वफ़ादारी की अलामत बताया हैं।

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